➤ भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया
➤ भाजपा ने बंगाल में बहुमत पार कर पहली बार सरकार बनाने की स्थिति बनाई
➤ मतगणना के दौरान कई जगह तनाव, राजनीतिक माहौल बेहद गरमाया
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव का संकेत दिया है। सबसे बड़ा उलटफेर भवानीपुर विधानसभा सीट से सामने आया, जहां भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को करीब 15,114 वोटों के अंतर से पराजित कर दिया। यह वही सीट मानी जाती रही है जिसे ममता बनर्जी का सबसे सुरक्षित गढ़ समझा जाता था, ऐसे में यह हार राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है।
मतगणना के शुरुआती राउंड से ही शुभेंदु अधिकारी ने बढ़त बनानी शुरू कर दी थी और धीरे-धीरे यह अंतर हजारों वोटों तक पहुंच गया। अंतिम दौर तक यह अंतर निर्णायक हो गया, जिसने परिणाम को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया। जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह सिर्फ एक सीट की जीत नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने विभिन्न समुदायों के मतदाताओं का समर्थन मिलने की बात कही और इसे व्यापक जनादेश बताया।
दूसरी ओर, इस हार के साथ ही ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी को बड़ा झटका लगा है। पिछले डेढ़ दशक से बंगाल की सत्ता पर काबिज रही टीएमसी के लिए यह चुनाव निर्णायक साबित होता दिख रहा है। चुनाव आयोग के रुझानों और परिणामों के अनुसार, भाजपा ने 156 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है और 50 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए रखी है, जिससे उसका कुल आंकड़ा 200 के पार पहुंच गया है। 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 148 (एक सीट पर मतदान रद्द होने के कारण प्रभावी बहुमत 147) है, जिसे भाजपा ने आराम से पार कर लिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा की इस सफलता के पीछे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बढ़ता जनाधार, मजबूत संगठनात्मक रणनीति और व्यापक चुनावी अभियान प्रमुख कारण रहे। वहीं, टीएमसी के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी, भ्रष्टाचार और स्थानीय मुद्दों ने भी मतदाताओं के रुझान को प्रभावित किया।
हालांकि, चुनावी नतीजों के बीच राज्य में तनावपूर्ण हालात भी देखने को मिले। हावड़ा के दुमुरजाला क्षेत्र में टीएमसी कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना सामने आई, जबकि कूच बिहार में भी झड़प की खबरें आईं। इससे स्पष्ट है कि परिणामों के बाद भी राजनीतिक माहौल पूरी तरह शांत नहीं है और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी इन नतीजों के व्यापक राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। बंगाल में भाजपा की संभावित सरकार को आगामी लोकसभा चुनावों से पहले एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, विपक्षी दलों के लिए यह परिणाम रणनीतिक पुनर्विचार का संकेत माना जा रहा है।
इसी बीच, अन्य राज्यों के नतीजों पर नजर डालें तो असम में भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन जारी रखा, जबकि केरल में यूडीएफ गठबंधन जीत के करीब पहुंच गया है। तमिलनाडु में भी सत्ता परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि 2026 के ये चुनाव कई राज्यों में राजनीतिक समीकरण बदलने वाले साबित हो रहे हैं।



